चुनाव से पहले PM मोदी का बड़ा दांव, इन लोगों के आएंगे अच्‍छे दिन!

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लोकसभा चुनाव में अब कुछ महीनों का समय बचा है. चुनाव के नजदीक आते ही मोदी सरकार की ओर से वो हर दांव आजमाए जा रहे हैं जिसके जरिए हर वर्ग के वोटर्स को लुभाया जा सके. मसलन, हाल ही में जनरल कैटेगरी में 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया गया. इसी तरह 40 लाख तक के टर्नओवर वाली कंपनियों को जीएसटी फ्री कर छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत दी गई.

वहीं सरकार चुनाव से पहले किसानों और बेरोजगारों के लिए भी कई खास तोहफे देने की तैयारी में है. अब सरकार एक और बड़ा ऐलान करने वाली है. आइए जानते हैं कि वो क्‍या ऐलान है और इसका फायदा किसे मिलेगा.

न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक सरकार छोटे कारोबारियों को सस्ते दर पर लोन देने की तैयारी है. इन कारोबारियों को ब्याज में 2 फीसदी तक की छूट मिल सकती है. इसके अलावा छोटे कारोबारियों को मुफ्त में एक्‍सीडेंट इंश्‍योरेंस की सुविधा भी मिल सकती है. यह इंश्‍योरेंस 5 से 10 लाख रुपये तक का हो सकता है. एजेंसी के मुताबिक इन दोनों मुद्दों पर पीएम मोदी विचार कर रहे हैं.

क्‍यों लिया जा सकता है फैसला

रॉयटर्स के मुताबिक 2016 में पीएम मोदी की नोटबंदी के फैसले से सबसे अधिक छोटे कारोबारी प्रभावित हुए. इसके अलावा 2017 में जीएसटी के लागू होने के बाद भी छोटे कारोबारियों को कोई बड़ी राहत नहीं मिली बल्कि कंपोजिशन स्कीम बढ़ने की वजह से उनकी परेशानी ही बढ़ी. ऐसे में इस वर्ग के लोगों में मोदी सरकार को लेकर नाराजगी रही है. यही वजह है कि बीते कुछ समय से सरकार की ओर से कारोबारियों को लुभाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

हाल ही में हुआ ये ऐलान

हाल ही में जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी में छूट की सीमा को बढ़ाकर सालाना 20 लाख से 40 लाख रुपये कर दिया है. यानी 40 लाख रुपये तक के टर्नओवर वाले कारोबारी अब जीएसटी के दायरे में नहीं आएंगे. इसके अलावा काउंसिल की बैठक में कंपोजिशन स्कीम की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दी गई. यानि जिन कंपनियों का सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये तक है, वह अब इस स्कीम का फायदा उठा सकेंगी.

क्‍या है कंपोजिशन स्कीम

दरअसल, शुरुआती दौर में GST टैक्‍स सिस्‍टम की दिक्‍कतों से राहत देने के लिए सरकार ने छोटे कारोबारियों को कंपोजिशन स्कीम अपनाने का विकल्प दिया. इसके तहत छोटे कारोबारियों को हर महीने रिटर्न फाइल नहीं करना होता है.रसीदों को अपलोड करने का झंझट नहीं होता है. इसके अलावा टैक्स का एक निश्चित रेट, एकमुश्त टैक्स भरना होता है.

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