अगर यह व्यक्ति शामिल होता महाभारत में , तो क्षण भर में ख़त्म हो जाता युद्ध, जानिए कौन है यह शख्स

0
2137
अगर यह व्यक्ति शामिल होता महाभारत में , तो क्षण भर में ख़त्म हो जाता युद्ध, जानिए कौन है यह शख्स?

हिन्दू धर्म में महभारत के युद्ध को अब तक का सबसे बड़ा और अहम युद्ध माना जाता है. महाभारत विश्व का सबसे बड़ा धर्म ग्रन्थ है और यह युगों युगों से मानव सभ्यता को मार्ग दिखाता चला आ रहा है. महभारत के इस युद्ध के समय न श्री कृष्ण ने जो अ उपदेश दिए, यदि उनका स्मरण सच्चे मन से किया जाए तो आज हम हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी मुसीबत का समाधान ढूँढ सकते हैं. यह तो आप सभी जानते ही होंगे कि महाभारत का युद्ध कौरवों और पांडवों के बीच में हुआ था. इस युद्ध का का सबसे बड़ा कारण द्रोपदी को माना जाता है.

दरअसल, द्रोपदी के लिए एक स्वयंवर आयोजित किया गया था. इसमें अर्जुन ने मछली को वेध कर द्रोपदी को जीत लिया. जब पांचो भाई माँ कुंती के पास द्रोपदी लेकर पहुंचे तो उन्होंने बिना पीछे मुद कर देखे ही कह दिया कि, “पुत्रों तुम लोग जो भी लाये हो आपस में बाँट लो”. अपनी माँ का आदेश सुन कर पांचो भाई सन्न रह गए. उन्होंने माँ कुंती से अपना फैसला वापिस लेने को कहा मगर माँ कुंती ने कहा कि उन्हें फर्क नहीं पड़ता और वह जो भी चीज़ लाये हैं, पाँचों में बराबर बंटेगी.

इस घटना के बाद द्रोपदी हैरान थी कि वह पांच भाईयों के साथ भला कैसे रह सकती है? ऐसे में भगवान कृष्ण ने उनके बीच समझोता करवाया और आदेश दिया कि द्रोपदी एक साल हर पति के साथ बीताएगी. ऐसे में जो अपने समय से पहले द्रोपदी के पास जाएगा, उसे हमेशा के लिए जंगल जाना पड़ेगा. इसके बाद द्रोपदी पांचो भाईयो में बंट गई. सभी ख़ुशी ख़ुशी जीवन व्यतीत कर रहे थे.

मगर एक दिन पांडवों ने कौरवों के साथ जुए में कुछ बाकी ना बचने पर द्रोपदी को दांव में लगा दिया. शकुनी ने अपनी चलाकी से कुछ ऐसी चाल चली कि वह द्रोपदी को हार गए. जिसके बाद कौरवों ने द्रोपदी का चीर हरण करने का प्रयास किया. लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने द्रोपदी की भक्ति देख कर उसकी आबरू बचा ली. इसके बाद पांडवों और कौरवों के बीच महभारत का घमासान युद्ध आरंभ हो गया.

बहरहाल आज हम आपको एक ऐसे किरदार के बारे में बताने जा रहे हैं जो इतना शक्तिशाली था कि अगर वह महाभारत के युद्ध में शामिल होता तो क्षण भर में ही उस युद्ध को समाप्त कर देता. दरअसल यह कोई और नहीं बल्कि भीम का पुत्र बर्बरीक है. बर्बरीक की मां एक राक्षस कुल की संतान थी जबकि वह खुद एक शिव भक्त था. बर्बरीक ने अपनी कठिन तपस्या के चलते  भगवान शिव को प्रसन्न किया था जिसके बाद भगवान शिव ने उसे एक ऐसा अस्त्र प्रदान किया था जिसमें तीन बाण थे. इन बाणों में से अगर वह पहला बाण संधान करते तो युद्ध की भूमि में जिस को बचाना था, वह चिन्हित हो जाता. दूसरे बाण का संधान करते तो जिसका वध करना है वह चिन्हित हो जाता और तीसरे बाण का संधान करते ही समस्त शत्रुओं का नाश हो जाता और वह बान पुनः बर्बरीक के पास वापस आ जाता.

परंतु भगवान शिव ने इस वरदान बाण को देते वक्त बर्बरीक के आगे एक शर्त रखी थी कि वह इस बाण का प्रयोग केवल निर्बल पक्ष की ओर से ही कर सकता है परंतु अपने स्वयं के स्वार्थ के लिए उसका उपयोग वह कभी नहीं कर पाएगा. ऐसे में वह अस्त्र तभी काम आ सकता था जब मानवता को इसकी आवश्यकता हो. हालांकि बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण के पास जाकर युद्ध में हिस्सा लेने की इच्छा जाहिर की थी. परंतु भगवान कृष्ण जानते थे कि बर्बरीक जिस पक्ष की ओर खड़ा होगा उसी को जितवा देगा इसलिए उन्होंने कुछ ऐसा निर्णय लिया जिससे बर्बरीक धर्म संकट में पड़ गया.

कृष्ण ने बर्बरीक से कहा कि जैसे ही वह पांडवों की तरफ से उस बाण को चलाएगा वैसे ही कौरवों की सेना कमजोर पड़ जाएगी, जिसके बाद भगवान शिव की शर्त के अनुसार बर्बरीक को कमजोर पक्ष की ओर से लड़ना पड़ता. ऐसे में यह युद्ध कभी खत्म नहीं होता और पृथ्वी में मानव अस्तित्व समाप्त हो जाता. कृष्ण ने कहा कि अगर वह विश्व युद्ध में हिस्सा लेगा तो केवल वही धरती पर शेष बचेगा. हालांकि बर्बरीक ने युद्ध में लड़ने का वचन दे दिया था इसलिए मानवता की रक्षा के लिए उन्होंने अपने ही प्राण त्यागने का निश्चय किया और फिर अपना शीश काटकर भगवान कृष्ण को भेंट कर दिया.

भगवान कृष्ण ने बर्बरीक की तपस्या को देखकर उन्हें वरदान दिया कि वह महाभारत का पूरा युद्ध देख सकेंगे और अनंत काल तक लोगों के संकट का निवारण खाटू श्याम के रूप में करते रहेंगे. आज भी खाटू श्याम का मंदिर राजस्थान के 1 जिले में स्थित है जहां लाखों करोड़ों लोग हर साल अपने कष्टों के निवारण के लिए जाते हैं.

 

Loading...