बड़ा अविष्कार : अब कैंसर की जाँच घर बैठे मिनटों में कर सकते हैं , बिना किसी महंगे टेस्ट के, जानें कैसे

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दोस्तों कैंसर का नाम सुनते ही लोगो का दिल सहम जाता है क्योकि ये एक जानलेवा बीमारी है और अगर सही समय पर इसका इलाज नही किया गया तो ये बहुत ही विकराल रूप ले लेता है कैंसर आजकल भी तेजी से फैल रहा है। कभी कभी इसका पता देरी से चलता है और इंसान को बचा पाना मुश्किल हो जाता है| अस्पताल में भी कैंसर की जांच के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूलते हैं। और लोग भी जाच करने के लिए मोती से मोती रकम देने को तैयार हो जाते है|

इसलिए आज हम आपको ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं जिससे आप घर बैठे पता लगा सकते हैं की कही आपको कैंसर तो नहीं है| आजकल ज़्यादातर एसोफेगल कैंसर,बहुत ज्यादा फ़ैल रहा है और इसका सही समय से अगर जाच न हो तो ये हमारे लिए जानलेवा भी हो सकता है| आइये जानते है एसोफेगल कैंसर के बारे में,विस्तार से|

दोस्तों आपको बता दे की एसोफेगस में कोशिकाओं की असामान्य बढ़ोत्तरी होती है। एसोफेगस गले से आपके पेट तक भोजन और पानी ले जाने वाली नली को कहते हैं। एसोफेगस जहां पर पेट से जुड़ती है वहां इसकी परत एक अलग प्रकार की कोशिकीय बनावट की होती है, जिसमें विभिन्न केमिकल्स का रिसाव करने वाली अनेक ग्रंथियां या संरचनाएं होती हैं।

यदि एसोफेगस का कैंसर उस हिस्से से शुरू होता है जहां पर ट्यूब पेट से मिलता है, तो इस कैंसर को स्क्‍वामस सेल कार्सिनोमा कहते हैं। यदि यह एसोफेगस के ग्रंथियों वाले हिस्से से शुरू होता है तो इसे एडेनोकार्सिनोमा कहते हैं। एसोफैगल कैंसर में गले के अंदर की लाइनिंग का शेप और कलर बदलने लगता है । अगर इस कैंसर को ठीक समय पर नहीं पकड़ा गया तो इलाज मुश्किल होता है। इस ट्रीटमेंट से कैंसर को अर्ली स्टेज पर पकड़ा जा सकता है। एसोफैगल कैंसर को अर्ली स्टेज पर पकड़ पाना मुश्किल होता है।

केंब्रिज यूनिवर्सिटी की कैंसर रिसर्च यूनिट ने गले के कैंसर एसोफैगल से बचने और इसके बारे में पता लगाने के लिए एक ऐसा कैप्सूल बनाया है जिसमें धागा बांधकर इसे बाकी दवाइयों की तरह लेना होता है।  इस धागे को मुंह के बाहर ही पकड़ कर रखा जाता है। ये कैप्सूल जब पेट में जाता है तो अंदर जाकर 2-3 मिनट में ओपन हो जाता है।

इसमें से एक स्पंज बाहर आ जाता है जो सेल्स इकठ्ठे कर लेता है। और जब 5 मिनट हो जाता है तब इसे धागे से बाहर खींच लिया जाता है। ये स्पंज अपने साथ करीब आधा मिलियन सेल्स लेकर आता है। इसकी सेल्स की टेस्टिंग करके पता किया जा सकता है कि एसोफैगल कैंसर  की कोई संभावना है की नही रिचर्ड डेविस जो कैंब्रिज में सर्जन हैं, उन्होंने बताया कि इस कैंसर का पता लगाने का ये आसान और सस्ता तरीका है।

ऐसे कर लेने से मंहगी और तकलीफ देने वाली बायोप्सी नहीं करवानी पड़ती। रिसर्चर्स के अनुसार ये स्पंज कैंसर के सेल्स लेने में ज्यादा इफैक्टिव है क्योंकि ये पूरे गले में से अच्छे से सेल्स निकालकर लाता है। प्रोफेसर रेबेका फिजगेराल्ड ने बताया एसोफैगल कैंसर में गले के अंदर की लाइनिंग का शेप और कलर बदलने लगता है।

अगर इस कैंसर को ठीक समय पर नहीं पकड़ा गया तो इलाज मुश्किल होता है। और ये हमारे लिए जानलेवा भी हो सकता है और इस ट्रीटमेंट से कैंसर को अर्ली स्टेज पर पकड़ा जा सकता है।और सही समय पर इसका इलाज किया जा सकता है|

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