पूजा में इन चीज़ों का प्रयोग होता है अनिष्टकारी, जाने पूजा से सम्बंधी 10 आवश्यक नियम

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पूजा में इन चीज़ों का प्रयोग होता है अनिष्टकारी, जाने पूजा से सम्बंधी 10 आवश्यक नियम

हिंदू धर्म में पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है, अध्यात्मिक लाभ के साथ घर-परिवार की सुख-समृद्धी की कामना हेतु देवी-देवताओं की पूजा करने की परम्परा वर्षों से चली आ रही है। पर इस दौरान समय के साथ ही पूजा अर्चना की विधियों में कई सारे परिवर्तन भी देखने को मिले हैं, जबकि धर्म ज्ञाताओं की माने तो पूजा अर्चना के लिए प्राचीन विधियों का अनुसरण ही श्रेष्ट होता है। जबकि कई बार जानकारी के अभाव में लोग गलत विधि का अनुसरण कर लेते हैं, जो कि जातक के लिए अनुष्टकारी सिद्ध हो सकता है। ऐसे में पूजा से सम्बंधी नियमों की जानकारी होना आवश्यक है, आज हम आपको पूजा से सम्बंधी ऐसे ही 10 आवश्यक नियमों के बारे में बता रहे हैं।

आजकल लोग पूजा में अगरबत्ती का प्रयोग करते हैं जबकि वास्तव में पूजा में अगरबत्ती का प्रयोग निषेध माना गया है। अगर किसी भी पूजा की विधि को ध्यान से पढ़े या सुने तो पता चलेगा कि धुप का प्रयोग करें पर वहां अगरबत्ती का जिक्र आपको नहीं मिलेगा। दरअसल ऐसा इसलिए है, क्योंकि अगरबत्ती में जो डंडी लगी होती है, वो बांस से बनी होती है जबकि हमारे शास्त्रों में बांस की लकड़ी को जलाना अशुभ माना गया है। ऐसे में मान्यता है कि अगरबत्ती जलाने से पितृदोष लगता है।

  • प्लास्टिक की बोतल या किसी दूसरी धातु के अपवित्र पात्र में गंगा जल नहीं रखना चाहिए,आपको बता दें कि लोहे और एल्युमिनियम के बर्तन भी अपवित्र धातु की श्रेणियों में आती है। ऐसे में गंगाजल को रखने के लिए ताम्बे का बर्तन का प्रयोग ही उत्तम माना जाता है।

  • वहीं शास्त्रों के अनुसार, दिन में 5 बार देवी-देवताओ के पूजन का विधान है, जिसमें सबसे पहले प्रातः पांच बजे से छः बजे तक के बर्ह्म मुहूर्त में पूजन और आरती हो जानी चाहिए, वहीं इसके बाद सुबह 9 बजे से 10 बजे तक दूसरी बार पूजा करने का समय होता तो वहीं दिन में तीसरे समय का पूजन होना चाहिए। इसके पश्चात भगवान विश्राम करते हैं इसलिए इसके बाद शाम 4 – 5 बजे तक ही चौथी बार पूजन और आरती होनी चाहिए। सबसे आखिर में रात को 8 – 9 बजे शयन आरती करनी चाहिए। इस तरह से जिन घरों में नियमित रूप से पांच बार पूजा होती है, वहां देवी-देवताओ का निवास माना जाता है और ऐसे घरों में सुख-समृद्धी को में कोई कमी नहीं होती।

  • भगवान शिव, गणेश और भैरव जी की पूजा करते समय कभी भी इन तीनो देवो पर तुलसी ना चढ़ाए, अन्यथा पूजा का जातक पर विपरित प्रभाव पड़ता है।

  • कभी भी बिना स्नान किये तुलसी के पत्ते को न तोड़े, इससे देवी तुलसी तो जहां नाराज़ होती ही है, वहीं शास्त्रों की माने तो ऐसी तुलसी की पत्तियां देवताओं के लिए भी यह स्वीकार्य नहीं होती।

  • कभी भी पिघला हुआ घी और पतला चन्दन भगवान को अर्पित न करें, ऐसा करना शुभ नहीं होता।

  • वहीं भूल कर भी एक दीपक से दूसरे दीपक को नहीं जलाना चाहिए, इससे घर में दरिद्रता आती है और व्यक्ति को रोगादी का भय भी रहती है।

  • कभी भी अपवित्र अवस्था में शंख नहीं बजाना चाहिए, ये नियम स्त्रियों और पुरुषों दोनो के लिए है, इस नियम का पालन नहीं करने पर घर में बसी लक्ष्मी रूठ जाती है और उस घर से चली जाती हैं।
  • देवी देवताओ की मूर्ति के सामने कभी भी पीठ करके नहीं बैठना चाहिए।

  • भगवान की मूर्ति को स्नान कराते समय ध्यान रहे कि कभी भी मूर्ति को अंगूठे से ना रगड़ें, ऐसा करने से देवता नाराज होते हैं।
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