भारत का इकलौता ऐसा मंदिर जहाँ चोरी करने से होती है पुत्र की प्राप्ति, प्राचीन परम्परा के बारे में जानकार हो जाएँगे हैरान

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भारत का इकलौता ऐसा मंदिर जहाँ चोरी करने से होती है पुत्र की प्राप्ति, प्राचीन परम्परा के बारे में जानकार हो जाएँगे हैरान

भारत एक धार्मिक देश है। यहाँ कई धर्मों के लोग मिलकर एक साथ रहते हैं। सभी धर्म के लोगों की अपनी-पानी मान्यताएँ और परम्पराएँ हैं। सभी लोग अपनी इसी परम्परा के अनुसार अपने ईश्वर की आराधना करते हैं और उनसे सुखी जीवन का आशीर्वाद पाते हैं। हिंदू धर्म में मंदिरों का विशेष महत्व होता है। यही वजह है कि भारत के लगभग हर क्षेत्र में मंदिर पाए जाते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी स्थान हैं, जो मंदिरों के लिए ही जाने जाते हैं।

देवभूमि के नाम से पूरे विश्व में प्रसिद्ध उत्तराखंड के बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है। उत्तराखंड एक ऐसी जगह है, जहाँ देवताओं का वास माना जाता है। इस जगह पर धामों के दर्शन के लिए लोग दूसरे देशों से भी आते हैं। हर व्यक्ति की अलग-अलग ज़रूरतें होती हैं। सभी लोग अपी ज़रूरतों के हिसाब से मन में श्रद्धा लिए अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए आते हैं। लगभग सभी धर्मों में कुछ बातें समान होती हैं। हर धर्म में इन बातों पर ज़ोर दिया जाता है। मंदिर जाने से पहले भी लोगों से यह कहा जाता है कि उन्हें अनैतिक कामों से दूर रहना चाहिए।

लेकिन आपको जानकार काफ़ी हैरानी होगी कि भारत में एक ऐसा भी मंदिर है, जहाँ की पुरानी परम्परा के बारे में जानकार हैरान हो जाएँगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उत्तराखंड के चुड़ियाला गाँव में सिद्धपिठ चूड़ामणि देवी का मंदिर स्थित है। इस मंदिर की ऐसी मान्यता है कि सुनकर एकबार आपको यक़ीन नहीं होगा। जी हाँ इस धार्मिक स्थल पर जो भी लोग आते हैं, उन्हें अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए पहले चोरी करनी पड़ती है। भले ही यह सुनकर आपको यक़ीन ना हो लेकिन यह सच है। इस मंदिर की ऐसी मान्यता के पीछे एक बड़ी दिलचस्प कहानी है।

जानकारी के अनुसार इस मंदिर का निर्माण लंढौरा रियासत के राजा द्वारा 1805 ईसवी में करवाया गया था। ऐसा कहा जाता है कि एक बार राजा जंगल में शिकार करने गए, वाहन उन्हें माता की पिंडी के दर्शन हुए। राजा पिंडी को देखकर उसे अपने घर ले आए और घर पर माँ पिंडी की पूजा करने लगे। राजा का कोई पुत्र नहीं था। राजा ने पुत्र प्राप्ति के लिए माता से प्रार्थना की। माँ ने राजा की प्रार्थना सुन ली और उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दे दिया। पुत्र प्राप्ति के बाद राजा ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। उसके बाद से इस मंदिर में पूजा करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें काफ़ी समय से इस मंदिर में चोरी की परम्परा है। इस मंदिर में लोग पुत्र प्राप्ति की मनोकामना लिए देश के कोने-कोने से आते हैं। यहाँ ऐसी मान्यता है कि अगर आप पुत्र प्राप्ति की मनोकामना रखते हैं तो पहले आपको माता के चरणों में रखा लोखड़ा यानी गुड्डा चुराकर ले जाना होता है। ऐसा करने से पुत्र धन की प्राप्ति होती है। जब भी किसी दम्पति को पुत्र की प्राप्ति होती है तो उसे माता के चरणों में एक लोखड़ा चढ़ाना पड़ता है। इसी पुरानी परम्परा की वजह से इस मंदिर में भक्त आते हैं और चोरी करके जाते हैं ताकि उनकी इच्छा पूरी हो सके।

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